आखिर मुज़फ्फरपुर Smart City कैसे बनेगा ?

 

 

प्रगति के मार्ग पर बढ़ने को हम दो पद्धति में समझते हैं विकसित व विकासशील । उदाहरण हैं कई ऐसे देश जो वक्त के साथ आए नए चुनौतियों के अनुसार खुद को आधुनिकीकरण में अपनी भूमिका निभाते हैं इसलिये वे विकसित और वैसे जो खुद को वक्त के साथ तैयार नही करने में देर लगा दी, लेकिन पूर्णतः आधुनिकीकरण और एक मज़बूत सुचारु व्यवस्था और आदतें बनाने की ओर चल पड़े, वो आज भी विकासशील देश की श्रेणी में हैं।

स्मार्टसिटी बनाई नही जा सकती ये तो सिर्फ जीवनशैली को सुदृढ़ व वक्त के अनुसार खुद को तैयार रखने की परियोजना है जिससे हमारी जीवन और आसान हो सके। मानवीय मानसिकता के अनुसार रोटी,कपड़े और मकान को ही जीवन का आधार बताया गया है परंतु ये यहीं पर खत्म नही होती बल्कि स्वच्छ हवा,स्वच्छ जल बेहतर सुरक्षा,स्वास्थ्य व शिक्षा वयवस्था सहित कई और तथ्य सम्मिलित हैं तभी जाकर एक बेहतर कल की निर्माण हो सकती है जिसे स्मार्ट-सिटी कहते हैं। स्मार्ट-सिटी तब बनती है जब वहाँ की सरकार के साथ वहाँ के लोग भी स्मार्ट बने जिसके लिए सरकार के साथ-साथ हम सभी की भी जिम्मेदारी बनती है कि सरकार के कार्यों में अपनी सहभागिता दें।भारत की बात करें तो भारत सरकार और यहाँ कि जनता दोनों में कमी है अपने-अपने जिम्मेदारियों को समझने में और यही कारण है कि भारत आज भी एक विकासशील देशों की श्रेणी में है और सिर्फ संघर्ष पर संघर्ष ही कर रहा है।

“मुजफ्फरपुर” जो की भारत के बिहार राज्य का एक सुप्रसिद्ध ज़िला है जिसे ‘लीचीओं के शहर’ से भी जाना जाता है पिछले कई सालों से स्मार्टसिटी बनने के कतार में है मग़र देखा जाए तो अभी भी अनेकों कमियाँ हैं जिनपर सरकार को काम करने की जरूरत है हालांकि इसपर काफी समय पहले ही काम होना चाहिए था इसलिये यहाँ पर सरकार को निष्ठाबद्ध सक्रिय होने की जरूरत है और दूसरी तरफ जनता को खुद ही जागरूक होना होगा सरकार द्वारा किये गए कार्यों को सुरक्षित बनाये रखने पर । यदि ऐसा होता है― जब सरकार और सभी जनता के बीच एक आपसी सहमति व साथ देने की सोच होगी तब जाकर स्मार्ट-सिटी बनने में ज़रा भी देर न लगेगी।आज जरूरत है कुछ कर के दिखलाई जाए नही तो स्मार्ट-सिटी क्या अभी मुज़फ्फरपुर को एक साधारण सिटी बनने में कई महीने या साल लगेंगे जिस तरीके से यहाँ के सरकार व जनता की सोच है –

 

न ही साफ-सफाई,

न ही बेहतर पढ़ाई,

एकदूसरे पर उठाते रहो सवाल,

दिल में है तो बस खुद की कमाई।।

 

उपयुक्त पंक्ति को समझना होगा कि आज हमारा मुज़फ़्फ़रपुर कितना पीछे है ―टूटे रोड़, खुले व असुरक्षित नाले,कूड़े-कचरों का अंबार,चारो तरफ प्रदूषण,चिकित्सा में कमी,सुरक्षा में भी कमी वो कहने की बात है सबको लेकर कितना सजग है यह कि प्रशासन की हक़ीक़त तो कुछ और ही है जो सब सभी को नही बताते और अगर ऐसा न होता तो लोग प्रशासन को अपना मित्र समझने के बजाए उनसे दूर ही रहना अच्छा समझते हैं ये भी सुरक्षा के दृष्टि से ठीक नही, बिना अच्छे सुरक्षा के बेहतर भविष्य की बुनियाद हो ही नही सकती।

अब सरकार को सक्रियता पूर्वक बेहतर कदम उठाने की पहल करते हुए उसको पालन न करने व नुकसान पहुँचाने वाली जनता सहित उन सारे भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों जो अपने जिम्मेदारियों को निभाने के बजाय आराम करते हैं,उनपर उचित करवाई करनी चाहिए तब जाकर सरकार जब भी स्मार्ट-सिटी संबंधित कोई अनूठी कार्य करेगी एवं जब सभी जनता अपने सरकार का साथ देते हुए ईमानदारी से उसका पालन करेगी तब स्मार्ट-सिटी की ये सपना जरूर पूरा होगा नही तो ये सपना हमेशा सपना ही बना रहेगा।

 

कुछ पंक्ति जो सभी को समझना होगा―

 

सिटी को स्मार्ट बनाने से पहले,

खुद को स्मार्ट बनाना पड़ेगा ।

वरना स्मार्ट-सिटी का ये सपना सभी का,

सपना ही बना रहेगा ।

 

 

 

 

 

 

 

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Swaraj Shrivastava

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