मुजफ्फरपुर में पूरा नहीं हुआ Smart City का काम, अब कंपनी के पदाधिकारियों को मिलेगा सेवा विस्तार

मुजफ्फरपुर, जासं। समय पर स्मार्ट सिटी का काम पूरा नहीं होने पर एक साल के लिए बहाल स्मार्ट सिटी कंपनी के पदाधिकारियों को एक साल का सेवा विस्तार मिलेगा। नगर आयुक्त एवं स्मार्ट सिटी कंपनी के प्रबंध निदेशक विवेक रंजन मैत्रेय ने कंपनी के सीईओ, सीजीएम सहित 29 पदाधिकारियों व कर्मियों के सेवा विस्तार के लिए नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव एवं स्मार्ट सिटी कंपनी के चेयरमैन आनंद किशोर को पत्र लिखा है।लेटलतीफी व कार्यों को लेकर गंभीर नहीं रहने के कारण स्मार्ट सिटी के सभी डेढ़ दर्जन प्रोजेक्ट वर्क में विलंब हो गया है।

अबतक महज 25 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है।

आधा दर्जन ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिनका काम प्रारंभ भी नहीं हो सका है। इसका नतीजा है कि अब स्मार्ट सिटी कंपनी में बहाल सीईओ, सीजीएम सहित 29 पदाधिकारी व कर्मियों को सेवा विस्तार देने की नौबत आ गयी है। सभी की बहाली एक साल के लिए ही हुई थी । दूसरी तरफ, शनिवार को वीडियो कान्फ्रेंसि‍ंग के माध्यम से प्रधान सचिव स्मार्ट सिटी के कार्यों से अवगत हुए। खेल मैदान, आइसीसीसी बिङ्क्षल्डग निर्माण के साथ इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम के तहत शहरी क्षेत्र में जो आटोमेटिक ट्रैफिक लाइट, सीसीटीवी आदि लगाना है, इस कार्य को तय समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने का भी आदेश प्रधान सचिव ने दिया है।

सुरक्षा के न्यूनतम मानक भी नहीं, ऐसी एजेंसी को स्मार्ट सिटी का काम मिलने से सवाल

मुजफ्फरपुर। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 278.39 करोड़ की स्मार्ट सीवरेज लाइन पर काम के दौरान मजदूर की मौत ने सवाल खड़े किए हैं। इतनी बड़ी योजना के कार्य का टेंडर जिस तोशिबा वाटर साल्यूशंस एंड जयंती सुपर कंस्ट्रक्शन प्रालि कंपनी को दिया गया है उसके पास मजदूरों की सुरक्षा के न्यूनतम मानक वाली व्यवस्था भी नहीं थी। जो मजदूर काम कर रहे थे उनके पास सुरक्षा बेल्ट तक नहीं था। जबकि निर्माण श्रमिकों के जोखिम भरे कार्यों को देखते हुए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) अनिवार्य है। इसमें सुरक्षा हेलमेट या हार्ड टोपी सबसे महत्वपूर्ण है। ये सिर की चोटों से बचाती है।

सुरक्षा जूते घातक चोटें फिसलने और गिरने से बचाने के लिए होती हैं। इसके अलावा ईयर प्लग्स, सुरक्षा चश्मे और सुरक्षा दस्ताने भी जरूरी होते हैं। शनिवार को जहां हादसा हुआ वहां मजदूरों को ये बेसिक सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं थे। साइट इंजीनियर की जगह सुपरवाइजर या प्रोजेक्ट मैनेजर के जिम्मे ही पूरी योजना है। ऐसी एजेंसी को इतनी बड़ी योजना का टेंडर दिए जाने पर सवाल उठ रहा है।इतना ही नहीं एजेंसी को पूर्व में भी चेतावनी दी गई थी। सुरक्षा मानक का यहां पालन नहीं हो रहा था। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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