मुजफ्फरपुर में सेंट्रल जेल से निकल रहे एक आरोपी को पुलिस ने दोबारा गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को ठगी का यह आरोपी जमानत मिलने पर बाहर निकल रहा था। जैसे ही वह गेट से बाहर निकलकर रोड पर आया, तभी पहले से तैनात सदर थाना की पुलिस ने उसे दबोच लिया। गाड़ी में बैठकर थाना ले गए। वहां से उससे पूछताछ के बाद कोर्ट में पेश कर फिर जेल भेजने की कवायद की जा रही है।
आरोपी रजनीश पांडेय देवरिया का रहने वाला है। उसने बताया कि तीन महीने से वह जेल में था। जमानत पर बाहर निकला। इससे पहले जैतपुर ओपी की पुलिस ने उसे ठगी के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उस पर 4.80 लाख रुपए गबन करने का आरोप था। वहीं सदर थाना में वर्ष 2021 में उसके खिलाफ ठगी का मामला दर्ज हुआ था। जिसमें बंदूक और पिस्टल का लाइसेंस दिलाने के नाम पर 5.75 लाख रुपए ऐंठने का आरोप था।
रेकी कर रही थी पुलिस
दरोगा जैनेंद्र झा ने बताया कि सूचना मिली थी कि रजनीश जमानत पर बाहर निकल रहा है। दरोगा देवव्रत कुमार के साथ वे लोग जेल गेट के बाहर तैनात हो गए। जैसे ही आरोपी गेट से बाहर निकलकर आया। उसे दबोच लिया गया। उस केस में उसे जेल भेजा जा रहा है।
भगवानपुर के रहने वाले व्यवसायी आलोक रंजन ने उसके खिलाफ सदर थाना में ठगी का आरोप लगा कर FIR दर्ज कराया था। कहा था कि रजनीश उनकी दुकान पर आता-जाता था। खुद का परिचय रिटायर्ड फौजी के रूप में दिया और कहा कि आप बिजनेस मैन हैं। आर्म्स लाइसेंस ले लीजिए। उसकी बातों में मैं आ गया और उसे कई बार में 4 लाख रुपए दिए। रजनीश ने चार महीने में लाइसेंस देने का वादा किया था। चार महीने बीतने के बाद भी जब लाइसेंस नहीं मिला तो उसे कॉल किया। इस पर उसने एक और व्यक्ति को लाइसेंस के लिए तैयार कराने की बात कही। उसने कहा कि 1.75 लाख रुपए का इंतजाम करवा दीजिए। दोनों का लाइसेंस हो जाएगा।
दोस्त से दिलवाया 1.75 लाख रुपए
आलोक रंजन ने बताया, अपने एक मित्र को इसके लिए तैयार कर लिया। उसके खाता में 1.75 लाख रुपए भेज भी दिया। कुछ दिन बाद उसने नागालैंड का लाइसेंस वॉट्सऐप पर भेजा। जब इसका विरोध किया और कहा कि मुजफ्फरपुर का लाइसेंस दिलवाइए तो रजनीश कहने लगा कि 1 महीने में इसे मुजफ्फरपुर में ट्रांसफर करा देगा। कई महीने बीतने के बाद भी लाइसेंस मुजफ्फरपुर का नहीं दिया। रुपए वापस मांगने पर टालमटोल करने लगा। ठगी का एहसास होने पर FIR दर्ज कराया था।

