भारतीय रेल का गजब कारनामा ! मुजफ्फरपुर से भोपाल के लिए भेजी गई थी लीची लेकिन पहुंच गई भुसावल, रेल मंत्रालय तक पहुंचा मामला

मुजफ्फरपुर, जासं। रेलवे में सामान के ओवरकैरी होने का मसला नहीं थम रहा। खराब नहीं होने वाले सामान अगर ओवरकैरी हो जाए तो उपभोक्ता को उतनी तकलीफ नहीं होती, लेकिन लीची अगर ओवरकैरी हो जाए सीधे किसानों के लिए घाटे का सौदा हो जाता है।

ऐसा ही एक मामला मुजफ्फरपुर के किसान कृष्ण गोपाल के साथ हुआ है। 31 मई को उन्होंने मुजफ्फरपुर जंक्शन से भोपाल शहर के लिए डेढ़ ङ्क्षक्वटल लीची 19484 बरौनी-अहमादाबाद एक्सप्रेस ट्रेन से भेजी। लीची की बुकिंग रानी कमलापति जंक्शन के लिए हुई थी। दो जून की रात साढ़े आठ बजे उक्त ट्रेन समय से रानी कमलापति जंक्शन पहुंच गई, लेकिन वहां रेलकर्मियों ने लीची नहीं उतारी। इस कारण लीची ओवरकैरी होकर भूसावल चली गई । इसकी खबर होने पर उन्होंने ट््िवट कर तुरंत इसकी शिकायत रेल मंत्रालय और भोपाल डीआरएम सहित अन्य रेल अधिकारियों से की। इसके बाद लीची भूसावल स्टेशन से दूसरे दिन रानी कमलापति भेजी गई। उसमें भी एक डिब्बा लीची कम थी।

छोटी सी लापरवाही के चलते क‍िसानों को भारी नुकसान

तीन दिनों तक लीची रास्ते में रह जाने से किसान को नुकसान हो गया। उन्होंने कहा कि रेल कर्मी दिन में तो लापरवाही करते ही हैं रात को और भी परेशान करते हैं । इसके कारण व्यापारियों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।मुजफ्फरपुर ज‍िले में 12 हजार हेक्टेयर में लीची की खेती होती है । करीब 20 हजार किसान इससे जुड़े हैं। लीची में मंजर आने व फल होने तक क‍िसान कठ‍िन पर‍िश्रम कर उसे देखेरेख करते हैं , लेक‍िन क‍िसी एक व्‍यक्‍त‍ि की छोटी सी लापरवाही के चलते भारी नुकसान उठाना पड़ता । उसका एक यह भी उदाहरण है । लीची के सीजन में क‍िसानों को कभी मौसम का डर तो मौसम अनुकूल न होने का डर लगा रहता है। ज‍िले के किसान व्यापारियों के माध्यम से ट्रेन व ट्रक से लीची को बाहर भेजते है।

 

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