Muzaffarpur में फंसा Corona से मरीजों का मुआवजा, डेथ सर्टिफिकेट देने में आनाकानी कर रहे निजी नर्सिंग होम

मुजफ्फरपुर में कोरोना की दूसरी लहर में पैसा कमाने के फेर में निजी नर्सिंग होम ने मरीजों को भर्ती तो कर लिया, लेकिन जब इनकी मौत हुई तो डेथ सर्टिफिकेट देने से पल्ला झाड़ लिया। ये ऐसे नर्सिंग होम हैं, जो कोरोना इलाज की सूची से बाहर थे। अब मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं रहने से मृतक के परिजनों को मिलने वाला मुआवजा फंस गया है। स्वास्थ्य विभाग के पास ऐसे 650 केस हैं, जिनमें कोरोना से मौत का  मुआवजा फंसा हुआ है। पीड़ित परिजन लगातार चक्कर काट रहे हैं।




निजी अस्पतालों ने स्वास्थ्य विभाग के आईडीएसपी पोर्टल पर मरीज की आईडी भी अपलोड नहीं की। इससे भी उनका मुआवजा फंसा हुआ है। निजी अस्पतालों के अलावा एसकेएमसीएच से भी कई मरीजों की आईडी पोर्टल पर अपलोड नहीं की गयी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिन लोगों के कागजात मिल गये हैं, उनकी सूची सरकार को भेज दी गयी है। आईडी अपलोड नहीं होने वाले मरीजों की भी जानकारी भेजी गयी है।


केस-1.
झपहां की रहने वाली मंजू देवी के पति को बीते मई में कोरोना हुआ था। हालत बिगड़ने के बाद उन्हें आननफानन में सीतामढ़ी रोड के निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, लेकिन उनके पति को बचाया नहीं जा सका। अस्पताल ने उन्हें कोरोना जांच की रिपोर्ट तो दी, लेकिन डेथ सर्टिफिकेट नहीं दिया। बिना डेथ सर्टिफिकेट के उनका आवेदन मान्य नहीं हो रहा है।


केस-2.
क्लब रोड की लक्ष्मी कुमारी के पति की मौत 23 अप्रैल को कोरोना से एक निजी अस्पताल में हो गयी, लेकिन डेथ सर्टिफिकेट नहीं मिला। उसने निगम से डेथ सर्टिफिकेट व अस्पताल में भर्ती का कागज स्वास्थ्य विभाग में जमा कराया है। लक्ष्मी ने आवेदन देकर कहा है कि उसे ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया। वह मायके में रह रही है, इसलिए मुआवजे की राशि का भुगतान किया जाये।


कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. विनय कुमार शर्मा ने कहा क निजी अस्पतालों में डेथ सर्टिफिकेट नहीं देने और आईडी अपलोड नहीं करने के मामले में सरकार से दिशा-निर्देश मांगा गया है। वहां से जो भी निर्देश जारी किया जायेगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जायेगी।

INPUT: Hindustan

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