मुजफ्फरपुर सदर अस्‍पताल में सिविल सर्जन के औचक निरीक्षण से हड़कंप, चिकित्सकों व कर्मचा‍र‍ियाें की लापरवाही उजागर

मुजफ्फरपुर, {अमरेंद्र त‍िवारी}। सिविल सर्जन डा.यूसी शर्मा निरीक्षण के लिए सदर अस्पताल पहुंचे। यहां की कुव्यवस्था देख उन्होंने गहरी नाराजगी जाहिर की। निरीक्षण के क्रम में मरीजों ने उन्हें बताया कि पिछले तीन दिनों से वार्ड में नल से पानी अनवरत बह रहा है।

प्रबंधक कार्यालय में इसकी शिकायत करने पर भी सुधार नहीं हो रहा। सीएस ने बह रहे पानी को तत्काल कपड़ा ठूंसकर बंद कराया। उनके निरीक्षण के समय 11 बजकर 15 मिनट के बाद वार्डों की सफाई की जा रही थी।

पग-पग पर मिली खामियां, हैरान दिखे सिविल सर्जन :

निरीक्षण के दौरान पग-पग पर मिली खामियां देख सिविल सर्जन हैरान थे। हड्डी रोग विभाग के ओपीडी के चिकित्सक मरीजों को छोड़कर उपाधीक्षक के वतानुकुलित कक्ष में चाय की चुस्की लेते मिले। उनका एक दिन का वेतन काटा गया। आंख व कान ओपीडी में चक्षु सहायक राजकिशोर राम के सहारे काम चल रहा था। यहां पता चला कि डा.वैदेही कुमारी अवकाश पर हैं। वहीं डा.नीतू कुमारी व ईएनटी के विशेषज्ञ चिकित्सक डा. जय प्रकाश अनुपस्थित थे। इनका वेतन बंद किया गया। ईसीजी जांच विभाग चतुर्थवगीय कर्मचारी ध्रुव प्रसाद के सहारे चलता मिला। वहां तैनात ईसीजी टेक्नीशियन रूबी कुमारी अनुपस्थित मिलीं। इस कारण मरीजों का इलाज बाधित था। इनके एक दिन का वेतन रोका गया। औषधि विभाग में डा. गिरधारी लाल मिले। वे 15 मरीजों का इलाज कर चुके थे। फीजियोथेरैपिस्ट अमरेश कुमार चार मरीजों का उपचार करते देखे गए। दवा भंडार के डाटा इंट्री आपरेटर अमन कुमार को अनुपस्थित पाया गया। यहां डीप फ्रीजर के ऊपर एंटी रैबिज वैक्सीन रखा हुआ मिला। अस्पताल प्रबंधक ने बताया कि डाटा आपरेटर अमन कुमार से दूसरी जगह पर काम लिया जा रहा है। सीएस ने नाराजगी जताते हुए इसको नियम के विपरीत बताया। फार्मासिस्ट ओमप्रकाश अनुपस्थित मिले। उनका एक दिन का वेतन रोका गया। सर्जिकल इनडोर एवं डायरिया वार्ड के निरीक्षण में मरीज प्रिंस कुमार ने बताया गया कि वार्ड में केवल डा. सीके दास भ्रमण करते हैं। प्रबंधक को वाट्सएप पर प्रतिदिन ओपीडी के चिकित्सक व वार्ड में मरीजों की सूचना फोटो के साथ देनी है। वह नहीं मिल रही है। पहले भी निरीक्षण के दौरान सुधार के लिए जो गाइडलाइन दी गई थी उसका पालन नहीं हो रहा है। सीएस ने प्रबंधक प्रवीण कुमार के सात दिनों का वेतन काटने का आदेश देते हुए जवाब मांगा है कि कुप्रबंधन के लिए उनकी संविदा को क्यों न समाप्त कर दिया जाए।

–कुप्रंबधन के कारण मरीजों की सेवा में त्रुटि हो रही है। इससे सरकार व विभाग की छवि खराब हो रही है। प्रबंधक के साथ चिकित्सकों का वेतन काटा गया है। सुधार नहीं होने पर आगे और सख्ती होगी। – -डा.यूसी शर्मा सिविल सर्जन

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