Muzaffarpur Smart City की सड़को पर कूड़े का अंबार खोल रहा नगर निगम के दावों की पोल

मुजफ्फरपुर। मानव बल एवं संसाधनों से लैस होने के बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। सड़कों व गली-मोहल्लों में लगा कचरे का अंबार निगम के सफाई के दावों की पोल खोल रहा है। अन्य दिनों में जहां शहर से प्रतिदिन दो से ढाई टन कचरे का उत्सर्जन होता था वहीं, दीपावली पर लोगों द्वारा घर व दुकान की सफाई करने से डेढ़ गुना बढ़ गया है। इस चुनौती से निपटने में निगम हांफ रहा है। दिन के साथ-साथ रात्रि पाली में भी उपकरणों के माध्यम से कचरे का उठाव किया जा रहा है इसके बाद भी सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। 




क्लब रोड में गुरुवार को पूरे दिन कचरे का अंबार लगा रहा, जबकि यह शहर की मुख्य सड़क में शामिल है। गली-मोहल्लों की बात करें तो वार्ड 48 की दास कालोनी, दुर्गा स्थान, शारदा नगर में कचरे का अंबार लगा है। यही हाल शहर के कई मोहल्लों और गलियों का है।


कमजोर प्रबंधन, कठघरे मे निगम प्रशासन
35 वर्ग किमी में फैला शहर। 60 हजार मकान और पांच लाख की आबादी। प्रतिदिन ढाई सौ टन कूड़े का उत्सर्जन। निष्पादन की जिम्मेदारी नगर निगम की। निगम शहर से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन में विफल साबित हुआ है। शहर की सफाई को लेकर पिछले एक दशक में दर्जनों योजनाएं बनाई गईं। कुछ कागजों पर रह गईं तो कुछ शुरू तो हुईं, लेकिन दो कदम चलने के बाद भटक गईं। वर्तमान में शहर की सफाई की हालत यह है कि लाखों नहीं करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। आप घूमकर देख लीजिए पता चल जाएगा कि ये पैसा कहां जा है


400 की आबादी पर एक सफाईकर्मी
शहर की सफाई का जिम्मा निगम के 1200 स्थायी व दैनिक सफाईकर्मियों पर है। यानी 400 की आबादी पर एक सफाईकर्मी। शहर के प्रत्येक वार्ड में 15-15 सफाईकर्मियों की टीम तैनात है। इनमें सड़कों पर झाड़ू देने वाली महिलाएं भी शामिल हैं। नाला की उड़ाही व कूड़े के उठाव के लिए भी अलग से सफाईकर्मी तैनात हैं। सिस्टम को चलाने के लिए सौ से अधिक वार्ड जमादार, अंचल निरीक्षक व अन्य लोग हैं। मानव संसाधन के बेहतर प्रबंधन में निगम अक्षम साबित हो रहा है।


हर साल सफाई पर 20 करोड़ का खर्च
शहर की सफाई के नाम पर निगम अपने खजाने की सफाई कर रहा है। निगम सफाई पर हर साल 20 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। सफाई वाहन हर साल तीन करोड़ रुपये का तेल पी रहे। प्रतिदिन डेढ़ लाख रुपये वाहनों के ईंधन पर खर्च होता है। समय-समय पर लाखों व करोड़ों के उपकरणों की खरीद अलग से। इसके बाद भी शहर में नारकीय हालात बने हैं। नगर प्रबंधक ओम प्रकाश ने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है। उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। दीपावली पर कचरे का उत्सर्जन बढ़ा है। इससे निपटने को हर संभव उपाय किए जा रहे हंै।


सफाई पर होने वाला खर्च एक नजर में
सफाईकर्मियों के वेतन पर –

वार्षिक – 13.20 करोड़
मासिक खर्च -1.10 करोड़
सफाई वाहनों के ईंधन पर खर्च
वार्षिक – तीन से चार करोड़
मासिक – 25 से 30 लाख
सफाई पर अन्य खर्च – 50 लाख रु.


निगम के पास उपलब्ध सफाई उपकरण
टै्रक्टर – 35
लोडर – 8
रोड स्वीपर मशीन – 01
सुपर साकर मशीन – 01
टिपर – 48


बाबकट – 10
कम्पैक्टर – 03
– हाईवा – 02
– कूड़ेदान 200 

INPUT: JNN

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