मुजफ्फरपुर। एमआईटी ने मेरे जीवन की जो दिशा तय की, आज उसकी बदौलत इस मुकाम पर हूं। आज 56 साल बाद भी इस कॉलेज से जुड़ी बातें जेहन में ताजा हैं। मंगलवार को अमेरिका से 56 साल बाद एमआईटी पहुंचे डॉ. अरविन्द कुमार ने ये बातें शिक्षकों और छात्रों से साझा कीं। उन्होंने कॉलेज के विकास के लिए 50 हजार डॉलर की रकम दी l
![]()

![]()
![]()
डॉ. अरविंद ने एमआईटी का दौरा किया और सेमिनार में भाग लिया। उन्होंने प्रिंसिपल डॉ. चंद्रभूषण महतो को यहां बुलाने के लिए धन्यवाद दिया। कहा कि 1973 में मैंने अमेरिका से उच्च शिक्षा प्राप्त की और वहां कार्यान्वित हो गया। मुजफ्फरपुर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्नातक करने के बाद कुछ साल बोकारो स्टील प्लांट में काम किया। उच्चतम शिक्षा के बाद कई अमेरिकी कंपनियों के साथ काम किया। उन्होंने बताया कि द्वितीय विश्वयुद्ध में प्रयुक्त हुए एटम बम बनाने वाली प्रयोगशाला में भी काम किया।
![]()
![]()
एमआईटी जीवन का सबसे अहम पड़ाव :
एमआईटी से 1965 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग से बीटेक करने वाले डॉ अरविंद कुमार ने इसी विभाग के प्रोफेसर रवि कुमार के साथ बैडमिंटन खेला और छात्रों के साथ फुटबॉल का भी लुफ्त उठाया l उन्होंने फार्मेसी विभाग का भी दौरा किया और अपने पुराने हॉस्टल एच2 गए l उन्होंने बताया कि किस प्रकार एलएस कॉलेज व दरभंगा मेडिकल कॉलेज के साथ पूर्व में स्पोर्ट्स मैच खेला करते थे l उन्होंने एमआईटी को अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव का दर्जा दिया।





INPUT: Hindustan
