Muzaffarpur नगर निगम के उदासीनता की भेंट चढ़ी कचरे से खाद बनाने की योजना, नही मिल सका विस्तार

मुजफ्फरपुर। नगर निगम यदि अपनी उपलब्धियों को आगे बढ़ाने में ईमानदारी दिखाता और जनता का सहयोग मिला होता तो अपना शहर भी इंदौर की तरह देश के स्वच्छ शहरों की सूची में शीर्ष स्थान प्राप्त कर सकता था, लेकिन न निगम ने कभी इसके लिए प्रयास किया और न ही जनता ने अपनी मानसिकता बदली।




इसका खामियाजा हमें भुगतान पड़ा। सबकुछ होते हुए भी हम स्वच्छता रैंकिंग में पिछले पायदान पर रहे। पांच साल पहले मुजफ्फरपुर का कचरा प्रबंधन का माडल देशभर में मिसाल बना था। कचरे से जैविक खाद तैयार कर खूब नाम कमाया था। राज्य सरकार ने सभी शहरी निकायों को इसे अपनाने को कहा था। इसके साथ ही पूरे सूबे के निकाय के प्रतिनिधि इसे देखने आए थे।


2016 में स्थापित की गई थी प्रोसेसिंग इकाई
स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं समृद्धि कार्यक्रम के तहत वर्ष 2016 में कंपनी बाग में सेंटर फार साइंस एंड एनवायरमेंट एवं इंडियन टोबैको कंपनी की मदद से कचरे से खाद बनाने के लिए प्रोसेसिंग इकाई की स्थापना की गई थी। लोगों को गीला व सूखा कचरा अलग-अलग कर निगम को उपलब्ध कराने को कहा गया था। इसके लिए शहर के 40 हजार मकानों को लाल व नीले रंग की डस्टबिन दी गई थीं। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन अभियान की शुरुआत की गई थी। योजना सफल रही। बाद में चंदवारा पानीकल कैंपस, सिकंदरपुर स्टेडियम के बाहरी परिसर, रौतनिया व एलएस कालेज परिसर में भी प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की गई। निगम ने पांच रुपये किलो की दर से खाद की बिक्री शुरू की। इससे निगम को अब तक 4.30 लाख की आमदनी हो चुकी है, लेकिन इस योजना को विस्तार नहीं दिया जा सका। रौतनिया यूनिट अभी तक चालू नहीं हुई और एलएस कालेज इकाई बंद हो गई। अभी प्रतिदिन पांच क्विंटल खाद तैयार की जा रही है।


डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का काम कुछ वार्डों तक सिमटा
देशभर में मिसाल बनी यह योजना धीरे-धीरे निगम प्रशासन की उदासीनता से क्षरण की ओर है। वह अब न तो खाद बनाने में विशेष रुचि ले रहा और न इसकी बिक्री में। निगम के स्टोर में 50 टन से अधिक खाद पड़ी है। वर्तमान में यह हालत है कि डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का काम महज कुछ वार्डों में सिमट कर रह गया है। इससे गीले कचरे का पूरी तरह से संग्रहण नहीं हो रहा है। यदि इस योजना पर ध्यान दिया जाए तो फिर से निगम कचरा प्रबंधन के इस माडल के बलबूते रैंकिंग में बेहतर स्थान प्राप्त कर सकता है।


शहरवासी नहीं बदल रहे अपनी आदत
घर और दुकान की सफाई कर कचरे को फेंकने का कोई समय निर्धारित नहीं है। ऐसे में लोग कभी भी कहीं कचरा फेंक देते हैं। नगर निगम जब शहर की सफाई कर लेता है तब दुकानदार दुकान का कचरा उठाकर सीधे सड़क पर फेंक देते हैं। इसलिए शहरवासियों को अपनी आदत बदलनी होगी। घर व दुकान की जब चाहे सफाई करें, लेकिन निकला कचरा रात में दुकान बंद करते समय डंपिंग स्थल पर डाल दें ताकि सुबह उसका उठाव हो सके। वहीं लोगों को चाहिए कि वह अपने घर का कचरा इधर-उधर नहीं फेंके। उसे या तो निगम की गाड़ी में डालें या फिर डंपिंग स्थल पर रखे गए कूड़ेदान में फेंके। इससे स्वच्छता के मामले में न सिर्फ जिले का नाम होगा, बल्कि शहरवासियों को स्वच्छ वातावरण में रहने का मौका मिलेगा।

INPUT: JNN

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