Muzaffarpur Smart City में बगैर पार्किंग ही 80 फीसदी भवनों का निर्माण, जाम का एक मुख्य कारण ये भी

मुजफ्फरपुर को स्मार्ट सिटी में शामिल कर दिया गया। इसके कई साल बाद भी जाम की समस्या से शहर निकल नही पा रहा है। जाम से निजात के लिए अलग-अलग कार्रवाई हो रही है, लेकिन मूल समस्या पार्किंग की है जिस पर कोई काम ही नहीं हो रहा। हालत यह है कि शहर के करीब 20 फीसदी कॉमर्सियल भवनों में ही पार्किंग की सुविधा है, बाकी के 80 फीसदी भवनों की पार्किंग सड़क पर ही होती है। नगर विकास विभाग ने यह व्यवस्था कर रखी है कि बिना 30 फीसदी पार्किंग स्थल के किसी भी भवन का नक्शा पास नहीं किया जाएगा, लेकिन इसपर अमल के अभाव में पक्के मकानों का जाल बिछता गया और शहर में जाम की समस्या गहराती चली गई।




लगातार बढ़ रही परेशानी
शहर के मुख्य इलाके मोतीझील, कल्याणी, हरिसभा, सरैयागंज, अघोरिया बाजार में जाम की समस्या काफी गहरी हो गई है। संयोग से इन्हीं इलाकों में नगर विकास विभाग के बिल्डिंग बॉयलॉज का उल्लंघन भी सर्वाधिक हुआ है। शहर में किसी भी तरह के भवन निर्माण के लिए पार्किंग स्थल का छोड़ा जाना अनिवार्य शर्त है। छोटे भवन में कुल जमीन का 25 फीसदी व बड़े भवनों में 30 फीसदी जगह पार्किंग के लिए छोड़ा जाना आवश्यक है। बड़ी-बड़ी कॉमर्सियल बिल्डिंग तो बन गई है, लेकिन उनमें पार्किंग के लिए जगह ही नहीं छोड़ी गई है। सड़क पर गाड़ियां लगतीं है।


निगम रिकार्ड में अधूरे रहते भवन
इस मामले में भवन मालिक बेहद चतुराई से काम कर रहे हैं। भवन मालिक निर्माण के लिए बने नक्शे में तो पार्किंग के लिए जगह छोड़ते हैं, लेकिन वास्तव में निर्माण पूरी जमीन पर कर लेते हैँ। नियम है कि नक्शा पास होने के बाद भवन मालिकों को निगम को उसके पूरे होने की रिपोर्ट भी देनी है, ताकि निगम की टीम नक्शे के अनुपालन की स्थिति की जांच कर सके। लेकिन अधिकांश भवन मालिक नक्शा पासा कराने के बाद कंप्लीशन रिपोर्ट ही नहीं दे रहे। निगम के रिकार्ड में ये भवन निर्माणाधीन ही होते हैं, जबकि वास्तव में उनका निर्माण कई साल पहले पूरा हो चुका होता है।

‘नगर निगम से पारित नक्शे का उल्लंघन कर हुए निर्माण पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए जुर्माने तक का प्रावधान है। पार्किंग स्थल नहीं छोड़े जाने की जांच व कार्रवाई जल्द शुरू होगी।’ – विवेक रंजन मैत्रेय, नगर आयुक्त


इन अधिकारियों पर है जांच का जिम्मा
नगर निगम में शहरी क्षेत्र का नक्शा पास करने के लिए व निर्माण में उसका अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की टीम गठित है। इसमें चार अधिकारी शामिल हैं। सीनियर एसडीओ उग्रमोहन प्रसाद सिंह, एसडीओ राकेश कुमार साफी, एसडीओ सीमा व एसडीओ संगीता को इस कमेटी में शामिल किया गया है। नक्शा पास होने से लेकर नक्शे के अनुपालन तक की निगरानी इन अधिकारियों को करनी है। लेकिन बिना पार्किंग की जगह छोड़े हो रहे निर्माण पर इस टीम की नजर ही नहीं पड़ती। इस मामले में अबतक एक भी भवन मालिक पर कार्रवाई नहीं की गई है।

INPUT:Hindustan

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