मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल का लाइसेंस हो सकता है रद्द, एक दिन में 12 ऑपरेशन करने का नियम लेकिन कर दिया 65 ऑपरेशन

मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द हो सकता है, क्योंकि राज्य स्तरीय टीम की जांच में कई प्रकार की खामियां सामने आई। इस दौरान पाया गया कि अस्पताल प्रबंधन ने कोरोना प्रोटोकॉल का ध्यान नहीं रखा। टीम ने उस वार्ड का भी जायजा लिया, जिसमें ऑपरेशन के बाद मरीजों को भर्ती किया गया था। वहां के हालात देखकर टीम दंग रह गई। वहीं, एक बात यह भी सामने आई है कि डॉक्टर ने एक दिन में 65 लोगों के आंखों का ऑपरेशन कर दिया है, जबकि दिनभर में 12 ऑपरेशन करने का ही मानदंड तय है।




वार्ड और बेड पर चारों तरफ गंदगी फैली हुई थी। दो बेड के बीच एक इंच भी गैप नहीं थी। किचन की स्थिति भी बुरी थी। छत पर पानी टंकी की वर्षों से सफाई नहीं हुई। हालांकि, केयरटेकर ने टीम को बताया कि ब्लीचिंग पाउडर से हर वर्ष सफाई होती है। राज्य स्तरीय टीम के अधिकारी डॉ. हरिश्चंद्र ओझा ने बाकायदा इसका वीडियो भी बनाया और मोबाइल से तस्वीर खींची।


अधिकारियों ने बताया, ‘हॉस्पिटल की व्यवस्था मानक के अनुरूप नहीं पाई गई है। इसकी रिपोर्ट वरीय पदाधिकारियों को सौंपेंगे।’ लाइसेंस रद्द होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये सरकार स्तर से फैसला लिया जाएगा।


सचिव और डॉक्टर समेत 14 नामजद
सिविल सर्जन डॉक्टर विनय शर्मा की ओर से जिन लोगों पर FIR दर्ज कराई गई है। उसमें मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल के सचिव दिलीप जलान, प्रबंधक दीपक कुमार, आंख के आपरेशन करने वाले डॉक्टर डॉ. ND साहू, डॉ. निरूपमा, डॉ. समीक्षा और यक्षु सहायक बबीता कुमारी, बिल्टू कुमार, सरस्वती रानी, विकास कुमार, भावना वर्मा, अनूप कुमार, साहिन प्रवीण, सौरभ कुमार व उमाशंकर सिंह का नाम शामिल हैं। इन पर इलाज और जांच में लापरवाही बरतने का आरोप है। टाउन DSP रामनरेश पासवान ने बताया, ‘FIR दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है।’


PMO ने लिया संज्ञान
प्रधानमंत्री कार्यालय ने मोतियाबिंद ऑपरेशन मामले में संज्ञान लिया है। बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारी रविन्द्र नाथ चौधरी को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। मानवाधिकार अधिवक्ता एस. के. झा द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय को भी मामले के संबंध में उचित कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा गया था, जिसके आलोक में PMO ने संज्ञान लिया है।


टीम ने माना हुई चूक
राज्य स्तरीय टीम ने जायजा और समीक्षा करने के बाद रिपोर्ट जारी की है। इसमें माना गया कि मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मरीजों के प्रति चिकित्सा में चूक हुई है। जिसके कारण 15 लोगों की आंखें निकालनी पड़ी। रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है कि अभी इस आंकड़े में बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना है, क्योंकि मरीजों की जो हालत है, उसे देखकर ये प्रतीत हो रहा है कि इन्फेक्शन बढ़ सकता है।


IGMS में होगा इलाज
SKMCH में अब मरीजों को भर्ती नहीं किया जाएगा। अब जो भी मरीज आएंगे उन्हें पटना रेफर कर दिया जाएगा। उनका इलाज IGMS में किया जाएगा। यह निर्णय राज्य स्तरीय टीम द्वारा जायजा लेने के बाद सरकार ने लिया है0। फिलहाल जो मरीज भर्ती हैं, उनकी 24 घंटे मॉनिटरिंग करने को कहा गया है। साथ ही पल-पल की रिपोर्ट और मरीजों की स्थिति से भी अवगत कराने को कहा गया है।


सबसे बड़ा सवाल आखिर कहां हुई थी चूक?
– अब सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि इलाज के दौरान कहां पर चूक, गड़बड़ी और लापरवाही हुई।
– कहीं एक ही ब्लेड से तो नहीं सभी मरीजों की आंखों का ऑपरेशन किया गया।
– अगर किया भी गया तो क्या उसे एक ऑपरेशन के बाद RL वाटर से साफ किया गया अथवा नहीं।
– क्या लैब में फंगस था? या कोई मरीज इंफेक्टेड था। इसलिए दूसरे भी हुए।
– क्या आंख में डालने वाली दवा खराब हो चुकी थी।
– इन सभी बातों का जवाब खोजने के लिए लैब के स्वाब को भी जांच के लिए भेजा गया है। वहां से कुछ दवाइयां भी जांच के लिए ली गई है। इसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है।

INPUT: Bhaskar

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