बीकानेर-गुवाहाटी एक्सप्रेस हादसे की जांच में बड़ा खुलासा, बिना मेंटेनेंस के ही 18 हजार KM दौड़ता रहा इंजन

यात्रियों की जान से महाखिलवाड़ का मामला सामने आया है। पिछले दिनों पश्चिम बंगाल में बीकानेर-गुवाहाटी एक्सप्रेस हादसे की जांच में पता चला है कि इंजन का समय पर मेंटेनेंस ही नहीं हुआ था। इस इंजन को 4500 KM चलने के बाद पीरियोडिकल एग्जामिनेशन के लिए भेजा जाना था, लेकिन इंजन बिना जांच 18 हजार KM तक चलाया गया। इस हादसे की जांच कर रहे कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) मो. लतीफ खान ने 10 फरवरी को पूर्वोंत्तर सीमांत रेलवे मालीगांव गुवाहाटी के GM को पत्र लिखकर यह जानकारी दी है।

CRS ने जांच रिपोर्ट में एक और बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने जांच रिपोर्ट में कहा है कि समस्तीपुर रेल डिवीजन में इलेक्ट्रिक इंजन की मेंटेनेंस की सुविधा ही नहीं है, लेकिन फर्जी तरीके से मेंटेनेंस का सर्टिफिकेट जारी किया जाता था। इससे पता चला कि बिना जांच के इंजन को दौड़ा कर लोगों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा था। उन्होंने जांच रिपोर्ट में कहा है कि रेलवे को इस मामले की जांच करनी चाहिए कि जहां जांच की व्यवस्था ही नहीं है, वहां से सर्टिफिकेट कैसे जारी होता था। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इंजन की जांच समय पर हो, यह सुनिश्चित किया जाए।

बता दें, 14 जनवरी को पश्चिम बंगाल के जलपाइगुड़ी में हुए हादसे में 9 यात्रियों की मौत हो गई थी और 36 यात्री घायल हुए थे। इस घटना के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव घटना स्थल पर पहुंचे थे और हाइलेवल जांच कमेटी बनाई थी।

 

CRS ने पूछा- समस्तीपुर में क्या भूत जांच का काम करते हैं ?

CRS लतीफ खान की जांच रिपोर्ट में एक और बड़ा खुलासा यह हुआ है कि समस्तीपुर रेल डिवीजन में इलेक्ट्रिक इंजन के मेंटेनेंस की सुविधा ही नहीं थी, लेकिन वहां पर इलेक्ट्रिक इंजन का मेंटेनेंस दिखा सर्टिफिकेट जारी किया जाता था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में घोस्ट (भूत) शब्द का इस्तेमाल किया है। यानी जहां पर इलेक्टिक इंजन के जांच की व्यवस्था नहीं है। वहां पर क्या भूत यह काम करता है। यह भी छानबीन का विषय है।

 

सवाल- जहां जांच की सुविधा ही नहीं, वहां सर्टिफिकेट कैसे जारी

CRS की जांच में यह साफ हो गया है कि फर्जी तरीके से ट्रेन के इंजन का मेंटेनेंस होता था और सर्टिफिकेट जारी किया जाता था। बिना ट्रेन इंजन की जांच के ट्रैक पर ट्रेन को दौड़ाया जाता है। कमिशनर ऑफ रेलवे सेफ्टी ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि रेलवे को इस मामले में जांच करनी चाहिए कि जहां पर इलेक्टिक इंजन के जांच की व्यवस्था नहीं है तो वहां पर कैसे जांच सर्टिफिकेट जारी किया जाता था?

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