मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ी, जिला उपभोक्ता आयोग ने जारी किया नोटिस, पीड़ितों ने दर्ज कराया था परिवाद

मुजफ्फरपुर जिले के चर्चित आई हॉस्पिटल कांड में हॉस्पिटल प्रबन्धन की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। जिला उपभोक्ता आयोग ने आई हॉस्पिटल को फिर से नोटिस जारी किया है। विदित हो कि गत वर्ष 22 नवम्बर को आई हॉस्पिटल मुजफ्फरपुर द्वारा मोतियाबिंद मरीजों का ऑपरेशन किया गया था, जिसमें हुई गड़बड़ी के कारण 15 मरीजों की आँख निकालनी पड़ी थी।

अपनी आंख गंवा चुके मरीजों में से राममूर्ति सिंह, हरेंद्र रजक, पन्ना देवी और प्रेमा देवी की ओर से जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष 10 लाख रूपया मुआवजा के लिए आई हॉस्पिटल के विरुद्ध परिवाद दायर किया गया था। अब पुनः पाँच अन्य पीड़ित भरत प्रसाद सिंह, सुखदेव सिंह, शत्रुधन महतो, भरत पासवान तथा सावित्री देवी ने न्याय पाने के लिए जिला उपभोक्ता आयोग का रुख किया है।

आयोग द्वारा पीड़ितों की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव, शल्य चिकित्सक डॉ. एन. डी. साहू एवं ओटी असिस्टेंट के विरुद्ध फिर से नोटिस जारी किया गया है। अगली तिथि पर सभी को उपस्थित होना होगा। ज्ञात हो कि पीड़ितों की ओर से मानवाधिकार अधिवक्ता एसके झा केस लड़ रहे हैं।

अधिवक्ता ने कहा कि एक व्यक्ति बेहतर स्वास्थ्य पाने के लिए अस्पताल का रुख करता है लेकिन यहाँ तो अस्पताल ने आंखों को रौशनी देने के बजाय लोगों से आंखें ही छीन ली। यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन के अतिगंभीर कोटि का मामला है। पूर्व में भी आयोग द्वारा इस मामले में एक नोटिस जारी किया जा चुका है। अब आयोग द्वारा पांच अन्य पीड़ितों की याचिका पर सुनवाई करते हुए फिर से नोटिस जारी किया गया है।

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