बिहार के मुजफ्फरपुर में पुलिस पर हमला करने के आरोपियों पर कार्रवाई में भी पुलिस बेपरवाह है। जिले में पुलिस पर हमले के सौ मामलों में 769 आरोपित फरार चल रहे हैं। इनके खिलाफ आईओ कार्रवाई दबाए बैठे हैं।
पुलिस पर हमले और सांप्रदायिक मामलों के आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई दबाए रखने पर मुख्यालय ने नाराजगी जाहिर की है। इन मामलों में अज्ञात पर एफआईआर दर्ज करने पर आपत्ति जताई है।
आईओ पर भी अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश
पुलिस मुख्यालय की सख्ती के बाद एसएसपी जयंतकांत ने इन आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। मामले को दबाए बैठे आईओ पर भी अनुशासनिक कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। एडीजी विधि व्यवस्था ने एसएसपी को पत्र भेजकर कहा है कि पुलिस पर हमले व सांप्रदायिक मामलों में दर्ज होने वाली एफआईआर को गंभीरता से लें। अज्ञात आरोपितों पर केस होने से मामले में कार्रवाई करने व कांडों के निष्पादन में कठिनाई होती है।
नामजद एफआईआर ही दर्ज करें
एडीजी ने निर्देश दिया है कि सभी थानाध्यक्ष पुलिस पर हुए हमले में साक्ष्य आधारित नामजद एफआईआर ही दर्ज करें। आरोपितों की गिरफ्तारी विशेष अभियान चलाकर करें। अज्ञात आरोपितों के नाम-पते के सत्यापन के लिए लंबे समय से लंबित सभी कांडों की समीक्षा एसएसपी करें और आईओ को निष्पादन के लिए आवश्यक निर्देश दें। इसके लिए थानावार लक्ष्य निर्धारित किया जाए। प्रत्येक माह इसकी समीक्षा एसएसपी करें।
रिपोर्ट सात दिनों के अंदर मुख्यालय को भेजें
एडीजी ने कहा है कि पुलिस पर हमले में वरीय अधिकारी पर्यवेक्षण व प्रतिवेदन-2 निर्धारित समय सीमा के अंदर जारी करें ताकि अनुसंधान व अन्य कार्रवाई प्रभावित नहीं हो। इस संबंध में बिहार पुलिस हस्तक नियम 61 के तहत कार्रवाई को लटकाने वाले पदाधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करें। इसकी रिपोर्ट सात दिनों के अंदर मुख्यालय को भेजें।
