जॉब के लिए आयोजित परीक्षाओं में फर्जीवाड़े की छानबीन कर रही पटना पुलिस की एसआईटी की जांच में सॉल्वर गैंग के कारनामे हर दिन सामने आ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो रेलवे और एनटीपीसी की परीक्षाओं में पास करवाने के नाम पर इस गैंग ने बिहार के साथ-साथ यूपी के भी सैकड़ों अभ्यर्थियों से एडवांस में 2 करोड़ से अधिक रुपये लिये हैं।
रुपये लेने के बाद सॉल्वर गैंग के चार सदस्य जेल गये, जबकि सरगना अतुल वत्स समेत चार सेटर फरार हैं। पूर्व में इस गिरोह के 10 से अधिक गुर्गे जेल जा चुके हैं।
फरार आरोपितों के मोबाइल स्विच ऑफ
सूत्र बताते हैं कि इन्हें रुपये देने वाले अभ्यर्थी अब परेशान हैं। गलत तरीके से परीक्षा में पास करने के लिये रुपये देने वाले ये अभ्यर्थी खुलकर सामने भी नहीं आना चाहते। वहीं पटना पुलिस की टीम सॉल्वर गैंग के आरोपितों का खाता खंगाल रही है। कई खातों को इन्होंने दूसरे के नाम पर रखा है। उन सभी की पड़ताल की जा रही है। बैंक से पुलिस सभी खातों की डिटेल मांग चुकी है।
मंगलवार तक पूरी जानकारी जांच टीम को मिल जायेगी। एसएसपी डॉ. मानवजीत सिंह ढिल्लो इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। हर रोज जांच में हुई प्रगति की रिपोर्ट एसआईटी पुलिस कप्तान को देती है।
बिहार से बाहर मिला अतुल का लोकेशन
सॉल्वर गैंग के सरगना अतुल वत्स का लोकेशन बिहार के बाहर मिला है। पटना में कई जगहों पर छापेमारी होने के बाद वह अलर्ट हो गया था। पुलिस उसके करीबियों और परिजनों पर नजर रख रही है। अतुल का बेहद खासमखास उज्जवल कश्यप भी भाग निकला है।
सॉल्वर गैंग के अन्य फरार सदस्यों को पकड़ने के लिये पटना पुलिस की एसआईटी ने पटना व नालंदा के दो दर्जन स्थानों पर छापेमारी की। पुलिस अश्विनी के नालंदा के तेल्हाड़ा बाजार स्थित घर पर शुक्रवार की रात पहुंची थी। उसके घर के सभी सदस्य फरार मिले। मुजफ्फरपुर स्थित अश्विनी सौरभ के ऑनलाइन परीक्षा सेंटर नव टेक्नॉलौजी के मैनेजर का बयान शनिवार को पटना पुलिस ने दर्ज किया।
ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा
ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों पर सेनेटाइजर के डिब्बे में बटन कैमरा लगाकर प्रश्नों की तस्वीर खींचकर उसे बाहर भेजा जाता था ताकि उत्तर का पता चल सके।
एनी डेस्क एप का इस्तेमाल कर शैक्षणिक संस्थानों से अभ्यर्थी का आईडी पासवर्ड लेकर उसे सॉल्वर से हल करवाया जाता है।
परीक्षाओं में असली अभ्यर्थी की जगह स्कॉलर को बैठा दिया जाता है।
मैग्नेटिक ईयरपीस का इस्तेमाल कर प्रश्नों का हल करवाया जाता है।
सॉफ्टवेयर से ऑनलाइन परीक्षा सेंटरों से लाइव आईपी एड्रेस जेनरेट करते हुये सामानांतर रूप से अपने लैपटॉप पर प्रश्नों को देखकर उसे हल करते थे।
ऑनलाइन परीक्षा लेने वाली कंपनियों के सिटी हेड को भी इस गिरोह के सदस्य मैनेज करते थे ताकि गड़बड़ी होने की बात बाहर लीक न करे।
सीए की रखी है टीम
सूत्रों की मानें तो यह बात सामने आयी है कि सॉल्वर गैंग ने करोड़ों रुपये मैनेज करने के लिये सीए की पूरी टीम लगा रखी है। अकाउंट से लेकर रुपये के मैनेजमेंट सीए देखते हैं। पुलिस उनका पता लगा रही है। तफ्तीश के दौरान यह बात भी सामने आयी है कि कई जगहों पर बने ऑनलाइन सेंटर में अश्विनी सौरभ ने अपने भाई और एक महिला को पार्टनर के रूप में रखा था। पुलिस उन दोनों का पता भी लगा रही है।
