देश में कैशबैक के नाम पर साइबर धोखाधड़ी करने वालों से सरकार ने सतर्क किया है। गृहमंत्रालय के अधीन ट्विटर हैंडल साइबर दोस्त पर बताया गया है कि सोशल मीडिया पर यूपीआई ऐप के जरिए भुगतान के ऑफर करने वाले डिस्काउंट कूपन, कैशबैक और फेस्टिवल कूपन से संबंधित तमाम छलपूर्ण आकर्षक विज्ञापनों से सावधान रहने की जरूरत है।
ऐसे की जाती है ठगी
ट्वीट में ये भी कहा गया है कि इनसे सतर्कता ही साइबर अपराध से सुरक्षित रख सकता है। रिजर्व बैंक के मुताबिक साइबर धोखेबाज फिशिंग के लिए लोगों के ऐसे ही लोक लुभावन लिंक भेजते हैं और उन्हें अपने जाल में फंसा लेते हैं। धोखेबाजी से जुड़े गिरोह बिल्कुल असली दिखने वाली नकली वेबसाइट बनाते हैं। वो किसी बैंक, सर्च इंजन या फिर ई-कॉमर्स से जुड़ी बेबसाइट की कॉपी होती है। फिर इन्हीं के जरिए लोगों को ठगने वाले लिंक भेजे जाते हैं।
लोगों को ये लिंक एसएमएस, ई-मेल, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया या फिर उनके मैसेंजर बॉक्स में भेजे जाते हैं। कई ग्राहक उन लिंक को बिना जाने परखे क्लिक कर देते हैं। साथ ही लुभावने ऑफर के भंवर जाल में फंसकर अपने बैंक से जुड़ी तमाम जरूरी जानकरी साझा कर देते हैं। इनमें उनका पासवर्ड, एटीएम पिन और यहां तक कि ओटीपी भी शामिल होता है। ये चीजें धोखेबाजों के गिरोहों के जरिए इस्तेमाल की जाती हैं।
रिजर्व बैंक की सलाह
रिजर्व बैंक ने लोगों को सलाह दी है कि ऐसे किसी भी अनजान लिंक को क्लिक नहीं करना चाहिए। साथ ही ऐसे धोखेबाज संदेशों को तुरंत डिलीट कर देना चाहिए। यही नहीं, ऐसे ईमेल का सब्सक्रिप्शन भी बंद कर देना चाहिए और जिस ईमेल से ऐसे संदेश आते हैं उन्हें भी ब्लॉक कर देना चाहिए ताकि गलती से भी कोई फर्जी लिंक न क्लिक हो। रिजर्व बैंक का ये भी कहना है कि वित्तीय लेन देन करते समय या फिर कोई खरीदारी करते समय सीधे असली वेबसाइट का ही सहारा लेना चाहिए।
2021 में इंटरनेट बैंकिंग धोखाधड़ी घटी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में वित्तवर्ष 2020-21 कै दौरान इंटरनेट बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़ी 69818 मामले सामने आए थे। वहीं, इसके पहले वित्तवर्ष 2019-20 में 73552 फ्रॉड के मामले सामने आए थे। रिजर्व बैंक की तरफ से जारी किए गए इन आंकड़ों में यूपीआई, डेबिटकार्ड और क्रेडिट कार्ड से भी जुड़े मामले शामिल हैं।
