पुलिस की गश्त में तेल के खेल पर मुख्यालय की नजर है। पांच साल से तिरहुत रेंज के जिले की पुलिस गश्त के लिए चल रही गाड़ियों में तेल के खपत का हिसाब नहीं दे रही है।
मुख्यालय से डीजीपी कार्यालय ने 2017 में ही आदेश दिया था कि हर माह वाहनों में खपत होने वाले तेल का हिसाब आईजी के माध्यम से पटना भेजा है। लेकिन अब तक जिलों से इसकी रिपोर्ट आईजी कार्यालय में नहीं भेजी जा रही है।
अब आदेश दिया गया है कि गश्त में निलकने वाली गाड़ियों को हर माह कितने इधन दिये गये। इसमें प्रति दिन कितने किमी. गाड़ियों को चलाया गया। प्रति दिन का यह हिसाब रखना है। जिसे माह के अंत में एकत्रित कर मुख्यालय भेजना है। मुजफ्फरपुर जिले के 40 थाने व ओपी में 75 गाड़ियां पुलिस गश्त में दिन रात चलाई जा रही है। इसके अलावा हर थाने में थानेदार के लिए सूमो या बोलेरो गाड़ी आवंटित की गई है। शराब जब्ती के लिए विशेष रूप से एक-एक गाड़ी सभी थाने में उत्पाद विभाग की ओर से दी गई है। जिसके खर्च का वहन उत्पाद विभाग कर रही है।
पुलिस गश्त में ज्यादात कमांडर जीप ही चल रही है। कमांडर जीप में 170 से 180 लीटर हर माह डीजल दिया जा रहा है। कमांडर जीप औसत तौर पर 10 किमी. प्रति लीटर के हिसाब से चलती है। इस तरह गश्त के नाम पर हर माह प्रत्येक जीप 1700 से 1800 किमी. चल रही है। लेकिन गश्त में चल वाली अधिकांश गाड़ियों की माइल मीटर खराब है। इसकी वजह से यह पता चल पाना कठिन है कि हर दिन गाड़ियों को कितना किमी. चलाया गया है। पुलिस लाइन के रक्षित डीएसपी विपिन कुमार ने निर्देश दिया है कि हर वाहन के चालक अपने लॉग बुक का संधारण हर दिन सुबह और शाम में करें। औचक निरीक्षण में लॉग बुक अद्यतन नहीं पाए जाने पर यह माना जायेगा कि चालक तेल में गड़बड़ी कर रहा है।
गश्ती गाड़ियों में पर्याप्त इंधन मुहैया हो रहा है। किसी माह में विशेष अभियान अधिक चलाया गया तो उस माह में इंधन खपत बढ़ जाता है। हर माह तेल के खपत का हिसाब लॉगबुक में संधारण करने का निर्देश दिया वाहन चालकों को दिया गया है। सभी वाहनों के लॉगबुक की प्रति मुख्यालय भी भेजी जायेगी। – जयंतकांत, एसएसपी
