मुजफ्फरपुर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने खुलकर आज अपनी बातें रखीं। उन्होंने बोचहां उपचुनाव में NDA की हार पर भी अपना बयान दिया। कहा कि बोचहां में हार का एकमात्र कारण कैंडिडेट का चयन है। और दूसरा कोई कारण नहीं है। कैंडिडेट के चयन में सोच विचार कर निर्णय लेना चाहिए चाहिए था। उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक मुसाफिर पासवान के निधन के बाद उनके बेटे अमर पासवान का ही इसपर हक था। पार्टी को चाहिए था कि उन्हें ही टिकट दें। उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा के बयान का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश चुनाव में मिली जीत के कारण BJP ओवर कॉन्फिडेंस का शिकार हो गयी और इसी कारण कैंडिडेट के चयन में गलती हुई। जो सहानुभूति वोट हमें मिलना चाहिए था। वह उनके पाले में चला गया। इसपर NDA को या BJP को विचार करने की ज़रूरत है। इस हार पर समीक्षा होनी चाहिए।
हमलोगों को समर्थन करना पड़ा
उन्होंने आगे कहा कि पार्टी ने एक कैंडिडेट दे दिया और हमलोगों को हर हालत में समर्थन करना पड़ा। चयन के समय सबलोग को आपस में बैठकर विचार करना चाहिए था। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। ये जनता को रास नहीं आया। इसका परिणाम आज सबके सामने है। उनसे पूछा गया कि क्या सरकार की नीतियां लोगों को रास नहीं आयी? इसपर उन्होंने कहा कि नहीं, ये सीधा मामला कैंडिडेट का है। ऐसे कई उदाहरण हैं कि जहां उपचुनाव होते हैं। वहां सहानुभूति वोट उनके परिवार के लोगों को ही मिलता है। यहीं पर चूक हो गयी थी।
ब्रह्मर्षि समाज ने दिखाई एकता
उन्होंने बोचहां उपचुनाव में ब्रह्मर्षि समाज की अनदेखी करने और उनकी नाराजगी पर भी अपनी बात रखी। कहा कि उन्होंने कहीं न कहीं खुद को नेगलेक्टेड पाया। जिसके कारण इस समाज ने एकता दिखाई और उन्हें सफलता भी मिली। लेकिन, अब ये बात बीते कल की बात हो गयी। आगे भविष्य में भी ऐसा ही होगा। यह कहा नहीं जा सकता।
