मुजफ्फरपुर नगर आयुक्त के फर्जी हस्ताक्षर से बनाया ट्रेड लाइसेंस, दो पर एफआईआर दर्ज

टैक्स चोरी करने के लिए नगर आयुक्त के फर्जी हस्ताक्षर से शहर में बड़े पैमाने पर फर्जी ट्रेड लाइसेंस बनाने का खेल किया गया है। रिन्युअल के लिए फर्जी ट्रेड लाइसेंस पेश किए जाने के बाद इसका खुलासा हो रहा है।

नगर निगम की ओर से नाजिरपुर के गल्ला व्यवसायी विशाल कुमार और बालूघाट के किराना दुकानदार जीतेंद्र कुमार के खिलाफ नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। नगर आयुक्त ने अब नगर निगम में रिन्युअल के लिए पेश किए गए सभी ट्रेड लाइसेंस की जांच कराने का आदेश दिया है।

नगर निगम की ट्रेड लाइसेंस शाखा के प्रभारी उमेश कुमार ने पुलिस को बताया कि बिजली कनेक्शन की तिथि के आधार पर शहर में बड़े पैमाने पर व्यवसाय व दुकानदारी करने वाले लोगों को शुल्क जमा कराने के लिए नोटिस जारी की गई थी। इसमें बिजली कनेक्शन की तिथि से प्रत्येक वर्ष के लिए 5 हजार रुपये की दर से जुर्माना सह शुल्क के साथ व्यवसायियों को अदा करना है। इसमें 1300 से अधिक व्यवसायियों ने पुराना ट्रेड लाइसेंस प्रस्तुत कर रिन्युअल के लिए एक वर्ष का शुल्क जमा किया है। इसी क्रम में विशाल कुमार और जीतेंद्र राम ने भी पुराना ट्रेड लाइसेंस नगर निगम में प्रस्तुत किया, जिसकी जांच करने पर दोनों लाइसेंस फर्जी पाए गए।

नगर आयुक्त ने दोनों व्यवसायियों पर शुल्क राशि के गबन के दृष्टिकोण से फर्जी हस्ताक्षर से बने छदम लाइसेंस प्रस्तुत करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया है। नगर थानेदार अनिल कुमार ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इस रैकेट के खिलाफ नगर निगम से कागजाती साक्ष्य लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हर दुकान व व्यावसायिक संस्थान पर जाएगी जांच टीम

नगर निगम के तहसीलदारों की टीम अब शहर के सभी भवनों में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों व दुकानों की जांच करेगी। टीम व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पहुंचकर ट्रेड लाइसेंस की मांग करेगी। इसमें हाल का ट्रेड लाइसेंस नहीं दिखाने वाले व्यवसायियों को पांच हजार रुपये वार्षिक जुर्माना की दर से शुल्क वसूला जाएगा। इसके लिए सार्वजनिक सूचना नगर आयुक्त ने जारी की है।

सर्वे में पकड़ी जाएगी प्रॉपर्टी टैक्स की चोरी भी

नगर आयुक्त ने बताया कि जिस भवन में व्यावसायिक प्रतिष्ठान या दुकानें हैं, उस भवन का प्रॉपर्टी टैक्स व्यावसायिक दर से अदा करना है। ट्रेड लाइसेंस के सर्वे में यह भी देखा जाएगा कि जिस भवन में दुकान है, उसका प्रॉपर्टी टैक्स व्यावसायिक दर से अदा किया गया है या नहीं। इस तरह ट्रेड लाइसेंस की सर्वे में प्रॉपर्टी टैक्स की चोरी भी पकड़ी जाएगी। इसमें तहसीलदार पर भी कार्रवाई होगी।

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