शहरी क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण काे देखते हुए परिवहन विभाग ने डीजल से चलने वाले ऑटाे परिचालन पर 1 अप्रैल से ही राेक लगा रखी है। इन ऑटाे काे अब शहरी क्षेत्र में चलाने के लिए क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार से काेई नया परमिट जारी नहीं किया जाएगा। शहरी क्षेत्र के लिए अब सिर्फ एक ही पेट्राेल, जबकि देहाती व शहरी इलाके में चलने वाले 13283 ऑटाे का प्राधिकार से परमिट जारी किया गया है। देहाती इलाके में पूर्व की भांति परिचालन हाेते रहेगा। लेकिन, शर्त यह है कि ये ऑटाे देहाती क्षेत्र से आने के बाद शहर की सीमा में प्रवेश नहीं करेंगे।
इधर, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार की ओर से डीजल चालित ऑटाे के परिचालन पर राेक के लिए एक कमेटी गठित की गई है। आरटीओ वरुण कुमार मिश्र की अध्यक्षता में यह कमेटी बिना परमिट वाले ऑटाे काे जब्त करेगी। कमेटी में डीटीओ व एमवीआई काे भी शामिल किया गया है। हालांकि, इसके बावजूद अब तक विभाग की ओर से डीजल ऑटाे परिचालन पर राेक लगाने की दिशा में काेई कार्रवाई नहीं की गई है।
असर में यात्रियाें काे शहर के विभिन्न इलाके में आने-जाने में होगी काफी परेशानी, खर्च बढ़ेगा
डीजल ऑटाे के परिचालन बंद हाेने से यात्रियाें काे शहर के विभिन्न इलाके में आने-जाने में काफी परेशानी हाेगी। उन्हें निजी वाहन या किराए पर अन्य वाहन लेकर जाना हाेगा। हालांकि, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार ने परमिट देने से मना ताे कर दिया है, लेकिन इस पर अमल कब और कैसे कराता है, इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हाे सकेगी। बता दें कि बैरिया में प्राइवेट बस स्टैंड है। वहां से प्रतिदिन करीब 1000 बसें विभिन्न स्थानाें के लिए चलती हैं। इन बसाें से बड़ी संख्या में शहरी क्षेत्र के लाेग आते-जाते हैं। यदि ऑटाे का परिचालन बंद हाे जाता है ताे लाेगाें काे काफी परेशानी हाेगी।
फायदा : जाम की समस्या काफी हद तक खत्म होगी, शहर में प्रदूषण का स्तर घटेगा
डीजल चालित ऑटाे के परिचालन बंद हाे जाने से शहर में प्रदूषण का लेवल काफी कम हाे जाएगा। शहर की हवा अक्सर रेड जोन में रहती है। वहीं, इससे शहर में जाम की समस्या काफी हद तक समाप्त हाे जाएगी। क्योंकि बेतरतीब ऑटो ठहराव को भी जाम के लिए बड़ा जिम्मेदार माना जाता है। जाम में काला धुआं उगलने वाले ऑटाे के पीछे वाले बाइक, साइकिल या पैदल सवार काे कई गंभीर बीमारियाें से निजात मिलेगी। जाम नहीं लगने से बाइक सवार काे कमर दर्द, जॉइंट पेन, सर्वाइकल, दमा, टीबी आदि बीमारियां कम हाेंगी।
ऑटाे पर राेक लगाना क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार के लिए चुनाैती
भले ही प्राधिकार की ओर से डीजल से चलने वाले ऑटाे के परिचालन पर राेक लगाने का निर्णय लिया गया है। लेकिन, देहाती क्षेत्र के नाम पर परमिट जारी कराकर शहरी क्षेत्र में ऑटाे का परिचालन जारी है। इस पर राेक लगाना चुनाैती हाेगी। दरअसल, देहात में 12 हजार से अधिक, जबकि शहरी क्षेत्र में 8 हजार ऑटाे प्रतिदिन चलता है।
निदान में सीएनजी या पेट्राेल ऑटाे काे परमिट देने का निर्णय
डीजल ऑटाे पर राेक के बाद सीएनजी या पेट्राेल ऑटाे काे परमिट देने का निर्णय लिया है। ऑटाे चालकाें काे अपनी गाड़ी में सीएनजी किट लगाना हाेगा। सरकार की ओर से सीएनजी किट लगाने के लिए दाे एजेंसियों काे जिम्मा दिया गया है। वहीं, दाे पेट्रोल पंप पर सीएनजी गैस भी मिलने लगी है। तीन आउटलेट खुलने की उम्मीद है।
‘प्रदूषण के बढ़ते स्तर काे लेकर प्राधिकार की ओर से शहरी क्षेत्र में डीजल से चलने वाले ऑटाे काे परमिट जारी करने पर राेक लगा दी गई है। अब शहरी क्षेत्र में काेई भी डीजल ऑटाे का परिचालन अवैध हाेगा। वर्तमान में पेट्राेल-सीएनजी से चलने वाले सिर्फ एक ऑटाे काे शहरी क्षेत्र में चलाने के लिए परमिट दिया गया है। जबकि, देहाती इलाके में अधिकतम 40 किमी की दूरी में चलाने के लिए डीजल चालित ऑटाे काे परमिट दिया जाएगा। पकड़े जाने पर उसे जब्त कर लिया जाएगा। इसके लिए कमेटी गठित की गई है। स्थायी परमिट 5 वर्षाें के लिए जारी की जाती है।’
-वरुण कुमार मिश्र, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, मुजफ्फरपुर
‘यदि ऐसा नियम प्राधिकार की ओर से जारी किया जा रहा है, ताे चालकाें के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। इसके लिए चालकाें काे सीएनजी या पेट्राेल किट लगाने के लिए समय देना चाहिए। बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए परमिट पर राेक लगाने से हजाराें ऑटाे चालकों के परिवार भुखमरी के शिकार हाे जाएंगे।’
