बारिश के बाद एक बार फिर प्रदूषण पर पहरा लगा। साेमवार की देर रात झमाझम बारिश से जहां एक तरफ लाेगाें काे गर्मी से राहत मिली ताे दूसरी तरफ शहर की हवाओं में घुला जहर भी धुल गया। मंगलवार काे तीन माह बाद शहर का एयर क्वालिटी लेवल एक्यूआई 50 के नीचे आ गया, जिससे हवा स्वच्छ हाे गई। बारिश के कारण जगह-जगह हुए जलजमाव और कीचड़ से भले ही परेशानी हुई।
लेकिन काफी दिनाें के बाद लाेगाें ने खुली हवा में चैन की सांस ली। इससे पहले फरवरी में बारिश हाेने पर ही प्रदूषण में भारी कमी आई थी। एक्यूआई औसत 22 पर आ गया था। नाले की गंदगी, धूल-कण, खुले में निर्माण सामग्री की आवाजाही और वाहनाें के धुएं से फिर हवा जहरीली हाेती चली गई। पिछले माह भी 12 दिनाें तक हवा रेड जाेन में रही, जबकि अन्य दिन प्रदूषण लेवल खराब श्रेणी में ही रही।
लेकिन, बारिश हाेने पर धूल-कण नहीं उड़ने से सुबह में शहर के विभिन्न इलाके में एक्यूआई औसत 40 पर अा गया। दाेपहर बाद बाजार में भीड़ बढ़ने पर जब वाहनाें का दबाव बढ़ा ताे अधिकतम एक्यूआई 80 पर गया। फिर भी संताेषजनक स्थिति हाेने से लाेगाें ने चैन की सांस ली।
कागजाें में सिमट कर रह गया आदेश – राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के निर्देशों का शहर में नहीं किया जा रहा पालन
राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की ओर से विभिन्न विभागाें काे प्रदूषण में कमी लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत नगर निगम काे नियमित तौर पर शहर की सड़काें पर पानी छिड़काव कराना है। इसके लिए पानी छिड़काव करने वाली दाे-दाे मशीन भी खरीदी गई हं। वहीं, खुले में निर्माण कार्य व बिना ढके निर्माण सामग्री की आवाजाही भी बेराेकटाेक जारी है।
15 साल पुराने वाहनाें, डीजल वाले ऑटाे के परिचालन में कमी लाने एवं इलेक्ट्रिक ऑटाे काे बढ़ावा देने की दिशा में तेजी कार्रवाई का निर्देश है। लेकिन, आदेश कागजाें में ही सिमट कर रह जाने से प्रदूषण लेवल अक्सर खतरनाक श्रेणी में बना रहता है।
